
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध इटावा जनपद के अनुदानित महाविद्यालयों के सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों ने लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के बहिष्कार का निर्णय लिया है। शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सेवा सुरक्षा प्रदान करने अथवा यूजीसी वेतनमान के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय दिए जाने की मांग की।
शिक्षकों ने कहा कि प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में करीब 25 वर्षों से सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें लगभग 3,000 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों के अनुसार यूजीसी की निर्धारित योग्यता पूरी करने के बावजूद उन्हें सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के उद्देश्य से कोई विरोध नहीं है, बल्कि अपनी लंबित मूल सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर योजना के बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। उन्होंने सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने तथा इन पाठ्यक्रमों में कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं संरक्षित करने की मांग की।
ज्ञापन देने वालों में डॉ. अंकुर वर्मा, डॉ. अश्विनी श्रीवास्तव, डॉ. आलोक अग्रवाल, डॉ. अभिषेक गौड़, डॉ. हृदेश सिंह, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. हेमेंद्र सिंह चौहान, डॉ. ममता यादव, डॉ. नीता पांडे, डॉ. नमिता पांडे, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. शिमला तहसीन, डॉ. केके यादव, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. नीलम यादव सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
रजत यादव पत्रकार
जन नीति 24 इटावा
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