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भरथना में झोलाछाप के क्लीनिक पर 16 वर्षीय राधा की मौत शव रखकर हंगामा स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

इटावा के भरथना थाना क्षेत्र के ग्राम बिरौधी में निजी क्लीनिक पर उपचार के दौरान 16 वर्षीय किशोरी राधा की मौत के बाद झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद किशोरी की हालत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने क्लीनिक के बाहर शव रखकर हंगामा किया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक अनुमति के क्लीनिक चलाने वालों पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कितनी प्रभावी है? यदि ऐसे क्लीनिकों के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आती हैं तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती?

ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा अथवा तत्काल उपचार उपलब्ध न होने के कारण निजी क्लीनिकों का रुख करते हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि बिरौधी और आसपास के क्षेत्रों में कितने निजी क्लीनिक संचालित हैं और उनमें उपचार करने वाले लोगों की शैक्षिक योग्यता तथा पंजीकरण की स्थिति क्या है।

कितनी मौतों के बाद जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

राधा की मौत के बाद लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जिले में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के उपचार से पहले कितने मरीजों की मौत या गंभीर नुकसान के मामले सामने आए हैं। यदि ऐसे मामलों का कोई विभागीय रिकॉर्ड है तो स्वास्थ्य विभाग को उसे सार्वजनिक करते हुए यह बताना चाहिए कि अब तक कितने अवैध क्लीनिकों की जांच, सीलिंग, मुकदमा या अन्य कार्रवाई की गई।

नोडल अधिकारी अमित दीक्षित ने मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है। अब सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल मुकदमा दर्ज कराने तक सीमित रहेगी या संबंधित क्लीनिक की वैधानिक स्थिति, चिकित्सक की योग्यता, पंजीकरण और वहां उपलब्ध दवाओं व उपचार पद्धति की भी विस्तृत जांच होगी।

क्या स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भी होगी जांच?

घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि संबंधित क्लीनिक लंबे समय से संचालित हो रहा था तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को क्यों नहीं हुई। क्या क्षेत्र में नियमित निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी है? यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

किशोरी की मौत ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। ऐसे में लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो और क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों के खिलाफ अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

रजत यादव पत्रकार
जन नीति 24 इटावा
मो.7417197064

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