
“ओ मां, तू कितनी भोली है, कितनी प्यारी है… मां वो हैं किस्मत वाले, जिनके मां होती है।” यह भावुक कर देने वाला दृश्य उस समय देखने को मिला, जब जनपद इटावा से करीब 50 किलोमीटर दूर कस्बा दिबियापुर में सात बेटियों ने रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए अपनी मां को अंतिम विदाई दी।

दिबियापुर निवासी कृष्णा देवी के पति रामकिशोर का कई वर्ष पूर्व निधन हो गया था। उनके सात बेटियां थीं और कोई बेटा नहीं था। पति के निधन के बाद कृष्णा देवी ने मेहनत-मजदूरी कर अपनी सातों बेटियों का पालन-पोषण किया और उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाई।

सोमवार शाम कृष्णा देवी के निधन के बाद सभी सात बेटियां एकत्र हुईं। उन्होंने निर्णय लिया कि मां का अंतिम संस्कार वे स्वयं करेंगी। इसके बाद बेटियों ने बारी-बारी से अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक पहुंचाया।

मां की अंतिम विदाई के दौरान सबसे छोटी बेटी ने आगे बढ़कर बेटों का फर्ज निभाते हुए विधि-विधान से अपनी मां को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार संपन्न किया। यह दृश्य देखकर श्मशान घाट पर मौजूद लोग भावुक हो उठे। लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा दृश्य देखा है, जहां सात बेटियों ने मिलकर अपनी मां को कंधा दिया और बेटी ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया।

बेटियों के इस साहसिक कदम की क्षेत्र में चारों ओर सराहना हो रही है। लोगों ने कहा कि बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। कृष्णा देवी ने जिस मेहनत और त्याग से अपनी बेटियों का पालन-पोषण किया, अंतिम विदाई के समय बेटियों ने भी मां के प्रति अपना फर्ज निभाकर समाज के सामने एक मिसाल पेश की।
रजत यादव पत्रकार
जन नीति 24 इटावा
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