
सरकारी रिकॉर्ड और राशन व्यवस्था में लापरवाही का हैरान करने वाला मामला बढ़पुरा विकासखंड के ग्राम विचारपुरा से सामने आया है। आरोप है कि यहां 19 वर्षीय जीवित युवती कीर्ति शाक्य को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर राशन कार्ड से उसका नाम काट दिया गया। खास बात यह है कि कीर्ति वर्तमान में जीवित है और बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। पीड़ित परिवार के अनुसार ग्राम विचारपुरा निवासी उमा देवी पत्नी शिवराज सिंह आर्थिक रूप से कमजोर हैं और लीवर की बीमारी से पीड़ित हैं। परिवार के पास अन्त्योदय राशन कार्ड था, लेकिन कथित तौर पर बिना उचित कारण बताए राशन कार्ड से नाम काट दिए गए। परिवार का आरोप है कि पहले उनकी बेटी कीर्ति शाक्य को मृत दर्शाया गया और इसके बाद पूरे परिवार का राशन कार्ड ही काट दिया गया। परिवार के सदस्य श्रीकांत शाक्य का आरोप है कि गांव के प्रधान ने राशन डीलर रणवीर सिंह यादव से कहकर उनके परिवार का राशन कार्ड कटवा दिया। उनका कहना है कि करीब तीन महीने से परिवार को सरकारी राशन नहीं मिल रहा है। राशन कार्ड बहाल कराने के लिए वह लगातार जिला पूर्ति कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो युवती जीवित है और बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है, उसे सरकारी रिकॉर्ड में मृत किस आधार पर दर्ज किया गया? आखिर उसकी मृत्यु की रिपोर्ट किसने लगाई और राशन कार्ड से नाम काटने से पहले विभागीय स्तर पर सत्यापन क्यों नहीं किया गया? परिवार का आरोप है कि बिना उचित जांच-पड़ताल के कीर्ति को मृत दर्शाने के बाद पूरे परिवार को राशन की सुविधा से वंचित कर दिया गया। इससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। श्रीकांत शाक्य का कहना है कि परिवार पिछले करीब तीन महीनों से राशन कार्ड बहाल कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने सरकारी रिकॉर्ड में की गई कथित गलती को तत्काल दुरुस्त कराने और राशन कार्ड बहाल कराकर बकाया राशन दिलाने की मांग की है। अब सवाल यह है कि राशन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज में बिना सत्यापन किसी जीवित व्यक्ति को मृत कैसे दर्ज कर दिया गया? प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में यह गलती कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
रिपोर्ट: रजत यादव, जन नीति 24 न्यूज़, इटावा