जनपद इटावा के थाना बलरई क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे बीहड़ी इलाके में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक ब्रह्माणी माता देवी मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की मान्यता दूर-दराज के क्षेत्रों तक फैली हुई है। नवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने, पूजा-अर्चना करने और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि ब्रह्माणी माता के दरबार में श्रद्धालु एक रुपये का सिक्का और पुष्प अर्पित कर अपनी मन्नत मांगते हैं। जिन भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है, वे चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में झंडा और घंटा चढ़ाकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने पहुंचते हैं। शारदीय नवरात्रि में भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन-पूजन करते हैं।
कभी चंबल के कुख्यात डाकुओं की शरणस्थली रहे आसपास के बीहड़
ब्रह्माणी माता मंदिर का इतिहास आसपास के बीहड़ी क्षेत्र और चंबल घाटी की पुरानी दस्यु गतिविधियों से भी जुड़ा बताया जाता है। एक समय इस इलाके के दुर्गम बीहड़ कुख्यात डाकुओं की शरणस्थली माने जाते थे। स्थानीय मान्यताओं और प्रचलित चर्चाओं के अनुसार, बीहड़ों में सक्रिय रहने वाले डाकुओं की भी ब्रह्माणी माता के प्रति गहरी आस्था थी।
बताया जाता है कि दस्यु सम्राट मानसिंह, लाखन सिंह, रूपा और निर्भय गुर्जर जैसे कुख्यात डाकू भी पुलिस से बचते हुए इस मंदिर में दर्शन करने और घंटा चढ़ाने आया करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर में पूजा-अर्चना करने आने वाले श्रद्धालुओं को डाकुओं द्वारा परेशान नहीं किया जाता था। हालांकि, इन ऐतिहासिक प्रसंगों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए प्रमाणित अभिलेखों की आवश्यकता है।
इस क्षेत्र में पुलिस और दस्यु गिरोहों के बीच कई बार मुठभेड़ होने की घटनाएं भी बताई जाती हैं। दुर्गम बीहड़ों और मध्य प्रदेश की सीमा के निकट होने के कारण डाकुओं के लिए जंगलों के रास्ते निकल जाना आसान माना जाता था। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में भी मंदिर के प्रति लोगों की धार्मिक आस्था बनी रही।
राजा रिपुदमन सिंह ने कराया था मंदिर का जीर्णोद्धार
बताया जाता है कि ब्रह्माणी माता मंदिर का जीर्णोद्धार राजा रिपुदमन सिंह ने कराया था। समय के साथ यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के रूप में भी अपनी पहचान बनाए हुए है। यमुना नदी के किनारे बीहड़ों के बीच स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति भी इसे विशिष्ट बनाती है।
पर्यटन विकास के नाम पर खर्च हुई धनराशि पर उठते सवाल
मंदिर के विकास और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से <span;><span;>पर्यटन विभाग की तरफ से भी इस मंदिर को भव्य विकास कराने के नाम से एक करोड़ रुपया भी आया था। जहां विकास कम अधिकारियों व स्थानीय ठेकेदारों द्वारा पैसों का बंदरबांट भ्रष्टाचार जरुर हुआ
स्थानीय स्तर पर मंदिर के विकास कार्यों में अनियमितताओं और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। आरोप हैं कि मंदिर के भव्य विकास के लिए आई करीब एक करोड़ रुपये की धनराशि के बावजूद अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो सके। ऐसे में संबंधित विभाग को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर खर्च की गई धनराशि और कराए गए कार्यों का ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सके और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र
ब्रह्माणी माता मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, लोकमान्यताओं और ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर की लोकप्रियता को दर्शाती है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि मंदिर परिसर का समुचित विकास कराया जाएगा, जिससे इस प्राचीन धार्मिक स्थल की पहचान और अधिक व्यापक हो सकेगी।
रजत यादव पत्रकार
जन नीति 24 इटावा
मो.7417197064