इटावा में PET परीक्षा को लेकर उमड़ी अभ्यर्थियों की भीड़ 22 केंद्रों पर 61 हजार से अधिक परीक्षार्थी यहां दे रहे हैं परीक्षा इटावा में संयुक्त किसान मोर्चा ने एसआईआर के विरोध में राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, डीएम शुभ्रान्त कुमार शुक्ल के माध्यम से प्रेषित कर चुनाव सुधार और वोट के अधिकार की उठाई मांग इटावा में जमीन कब्जाने के विवाद में दबंगों द्वारा गरीब की झोपड़ी में लगाई आग पत्नी-बच्चों संग खुले आसमान के नीचे आया परिवार इटावा में 40 क्वार्टर अवैध देशी शराब के साथ युवक गिरफ्तार लवेदी पुलिस ने दबोचा युवक की मौत पर परिजनों का हंगामा शव लेकर इटावा कोतवाली पहुंचे हत्या का आरोप लगाकर किया प्रदर्शन सैफई में मतदान के बाद अखिलेश यादव का भाजपा पर तंज, बोले— ‘वोट चोरी की यूनिवर्सिटी खोलनी चाहिए’

इटावा के 431 परिषदीय विद्यालयों में फर्नीचर का अभाव, टाट-पट्टी और जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर गरीब बच्चे

करोड़ों रुपये का बजट मिलने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं पर सवाल, सर्दी में बढ़ेंगी बच्चों की मुश्किलें चंबल क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इटावा के बेसिक शिक्षा विभाग को बेहतर शिक्षा हेतु करोड़ों रुपये का बजट दिये जाने के बाद भी जनपद के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावों के बीच बच्चों को इन स्कूलों में बच्चों को बैठने की बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। स्थानीय शिक्षा विभाग द्वारा बड़े-बड़े दावों के बीच न तो कुर्सी और न मेजों की व्यवस्था जिलें में 431 परिषदीय विद्यालयों के गरीब बच्चे टाट-पट्टी पर सीधे जमीन पर बैठकर अपने भविष्य की इबारत गढ़ रहे हैं। अगले माह नवम्बर से सर्दी का सितम शुरु होने वाला है, लेकिन आज तक इन विद्यालयों में व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी। पिछले वर्ष इटावा कई बार प्रदेश के सबसे ठंडे जिलों में शामिल होने के कारण सैकड़ों बच्चे सर्दी खा जाने से बीमार हो गये थे। ऐसे में यहां फर्नीचर के अभाव में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की मुश्किलें सर्दी में बढ़ सकती हैं। जिलें में करीब 1236 प्राथमिक विद्यालय है। इनमें 855 विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध हैं, जबकि 381 विद्यालयों में बच्चों के बैठने का उचित इंतजाम ही नहीं है। इसी तरह 248 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 50 स्कूलों में फर्नीचर नहीं है। इस तरह प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को मिलाकर कुल 431 स्कूलों में गरीब बच्चे जमीन पर बैठकर अपने भविष्य बनाने के लिए बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सूत्रों द्वारा बताया गया है कि इन स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील भोजन, सर्दी के कपड़े भी उपलब्ध नहीं होते। इन विद्यालय में गरीबों के ही बच्चे पढ़ते हैं क्योंकि अमीर घरानों के बच्चे तो कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं। जिलें के बीहड़ी चम्बल क्षेत्र में करीब आधा सैकड़ा प्राथमिक स्कूलों में टीचर पढ़ाने ही नहीं जाते जो शिक्षा विभाग के बाबूओं से सेटिंग कर बायोमेट्रिक में हाजिरी देकर घर बैठकर अपनी तरफ से इसी गांव का 5 हजार रुपये का शिक्षक बनाकर पढ़ाने के लिए भेज देते हैं, जबकि इन टीचरों का मानदेय 70 हजार से एक लाख रुपये होता है। जिलें के बेसिक शिक्षा अधिकारी कभी इन क्षेत्रों में जाते ही नहीं बेसिक शिक्षा विभाग पहले से ही भ्रष्टाचार में लिप्त है जिसमें कई बाबूओं के खिलाफ शासन द्वारा अचानक कार्यवाही भी हुई लेकिन शासन के उच्च अधिकारियों को पैसा देकर मामले को दवा दिया गया। इस विभाग में ज्यादातर बाबू एक ही पटल पर वर्षों से यहां तैनात हैं। यह जांच का विषय है शासन द्वारा शिक्षा विभाग की निष्पक्ष जांच होना चाहिए। गरीब बच्चों के शिक्षा के प्रति उनके जीवन का सवाल है।

रजत यादव पत्रकार
जन नीति 24 इटावा
मो.7417197064

 

Leave a Comment

और पढ़ें