
बुढ़वा मंगल पर्व के पावन अवसर पर शहर के प्रधान डाकघर के सामने स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बजरंगबली की पूजा-अर्चना की। भक्तों ने मीठी पूड़ी और बेसन की बूंदी का भोग लगाकर हनुमान जी से सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। पर्व को लेकर मंदिर को भव्य विद्युत झालरों और आकर्षक लाइटों से सजाया गया।

इसके साथ ही प्रसिद्ध पिलुआ वाले मंदिर, जुगरामऊ और पड़राया वाले हनुमान मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर हनुमान जी का आशीर्वाद लिया। विभिन्न मंदिरों में अखंड रामायण और सुंदरकांड के पाठ का आयोजन भी किया गया।
भीम के अहंकार से जुड़ी है मान्यता
मान्यता है कि महाभारत काल में कुंती पुत्र भीमसेन को अपने बल पर अहंकार हो गया था। उनके इस अहंकार को दूर करने के लिए हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप धारण किया। मार्ग में लेटे हनुमान जी की पूंछ को भीमसेन अपनी पूरी शक्ति लगाने के बावजूद नहीं हटा सके। इसके बाद उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और समझ आया कि वास्तविक शक्ति के साथ विनम्रता भी आवश्यक है। हनुमान जी के इसी वृद्ध स्वरूप के स्मरण और पूजन से इस पर्व को ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से जाना जाता है।

इस अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया तथा भक्ति भाव से जयकारे लगाए।
॥ संकट कटै मिटे सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करो गुरुदेव की नाईं॥
रजत यादव पत्रकार
जन नीति 24 इटावा
मो.7417197064