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शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में आधी रात गूंजा ‘जय कन्हैया लाल की’ का जयघोष, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

इटावा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पावन अवसर पर शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में शुक्रवार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ, मंदिर परिसर ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा।

श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की और पंचामृत व पंजीरी का भोग अर्पित किया। जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक झांकियों, रंग-बिरंगी लाइटों और सजावट से भव्य रूप दिया गया था। देर रात तक मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रही।

करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है अस्तल मंदिर

अस्तल मंदिर को शहर के प्राचीन और सिद्धपीठ मंदिरों में शामिल बताया जाता है। मंदिर में भगवान श्री नरसिंह और राधाकृष्ण की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। स्थानीय लोगों में प्रचलित मान्यता के अनुसार करीब 500 वर्ष पूर्व मुगल शासक औरंगजेब इन मूर्तियों को खंडित करने के उद्देश्य से मंदिर पहुंचा था। मान्यता है कि इसी दौरान मंदिर से विराट आवाज सुनाई दी, जिसके बाद औरंगजेब अपने सैनिकों के साथ वापस लौट गया।

इसी वजह से श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर परिसर में कभी पहलवानों के लिए अस्तल अखाड़ा भी हुआ करता था, जिसकी अपनी अलग पहचान रही है।

अस्तल अखाड़े से जुड़ी हैं स्वर्गीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव की स्मृतियां

अस्तल मंदिर और यहां के अखाड़े का संबंध समाजवादी आंदोलन के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव की पुरानी स्मृतियों से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजनीतिक जीवन के शुरुआती सोशलिस्ट पार्टी के दौर में स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा में रहकर इसी अखाड़े में पहलवानी किया करते थे।

बताया जाता है कि अखाड़े में अभ्यास के बाद वह कुएं के पानी से स्नान कर मंदिरों में पूजा-अर्चना करते और इसके बाद साइकिल से क्षेत्र में निकलकर लोगों से संपर्क करते थे। जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और आगे चलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के रक्षा मंत्री तक का दायित्व संभाला।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जब भी स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा आते थे, वह इन प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना अवश्य करते थे। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह इन मंदिरों को अपनी आस्था से जोड़कर देखते थे और भगवान का आशीर्वाद अपने राजनीतिक जीवन की शक्ति मानते थे।

अस्तल मंदिर के साथ ही शहर के नीलकंठ महादेव मंदिर को भी स्थानीय श्रद्धालु सिद्ध मंदिर के रूप में मानते हैं। मंदिर से जुड़ी पुरानी स्मृतियां आज भी शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

रजत यादव पत्रकार
जन नीति 24 इटावा
मो. 7417197064

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